लहूलुहान परों पर उड़ान रख देना

lahuluhaan paro par udaan rakh dena

लहूलुहान परों पर उड़ान रख देना शिकस्तगी में नया इम्तिहान रख देना, मेरे बदन पे लबों के निशान

बदन दरीदा हूँ यारो शिकस्ता पा हूँ मैं

badan darida hoon yaaro shikasta paa hoo main

बदन दरीदा हूँ यारो शिकस्ता पा हूँ मैं कि जैसे अपने बुज़ुर्गों की बददुआ हूँ मैं, वो शख़्स

बे हिसी चेहरे की लहजे की उदासी ले गया

be hisi chehre kee lahze kee udaasi le gaya

बे हिसी चेहरे की लहजे की उदासी ले गया वो मेरे अंदर की सारी बद हवासी ले गया,

वो मुहब्बत भी मौसम की तरह निभाता है

wo muhabbat bhi mausam ki tarah nibhata hai

वो मुहब्बत भी मौसम की तरह निभाता है कभी बरसता है कभी बूँद बूँद को तरसाता है, पल

उसे हम याद आते हैं फक़त फ़ुर्सत के लम्हों में

use hum yaad aate hain faqat fursat ke lamhon me

उसे हम याद आते हैं फक़त फ़ुर्सत के लम्हों में मगर ये बात भी सच है उसे फ़ुर्सत

चराग़ों से हवाएँ लड़ रही हैं

charagon se hawayen lad rahi hain

चराग़ों से हवाएँ लड़ रही हैं कि ख़ुद बच्चों से माएँ लड़ रही हैं, नशेमन तो उजाड़े थे

ता हद्द ए नज़र कोई भी दम साज़ नहीं है

taa hadd e nazar koi bhi dam saaz nahi hai

ता हद्द ए नज़र कोई भी दम साज़ नहीं है या फिर मेरी चीख़ों में ही आवाज़ नहीं

बच्चे की ज़िद को अब तो मेरा एतिबार दे

bachche kee zidd ko ab to mera etibar de

बच्चे की ज़िद को अब तो मेरा एतिबार दे ऐ आसमाँ ये चाँद मेरे घर उतार दे, चोरी

होश वालों को ख़बर क्या बे ख़ुदी क्या चीज़ है

hosh walon ko khabar kya be khudi kya cheej hai

होश वालों को ख़बर क्या बे ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है,

सदाक़त का जो पैग़म्बर रहा है

sadaqat ka jo paigambar raha hai

सदाक़त का जो पैग़म्बर रहा है वो अब सच बोलने से डर रहा है, कहानी हो रही है