तू क़रीब आए तो क़ुर्बत का यूँ इज़हार करूँ
तू क़रीब आए तो क़ुर्बत का यूँ इज़हार करूँ आइना सामने रख कर तेरा दीदार करूँ, सामने तेरे
Ghazals
तू क़रीब आए तो क़ुर्बत का यूँ इज़हार करूँ आइना सामने रख कर तेरा दीदार करूँ, सामने तेरे
उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा, इतना सच
बात ऐसी तो करो दिल पे असर कोई करे बिन तेरे कैसे जीया तुझ को ख़बर कोई करे,
हम ने काटी हैं तेरी याद में रातें अक्सर दिल से गुज़री हैं सितारों की बरातें अक्सर, और
तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है तुझे अलग से जो सोचूँ अजीब लगता है, जिसे न
जब लगे ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाये है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाये,
है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूबतर कहाँ अब ठहरती है देखिए जा कर नज़र कहाँ हैं दौर
बिगड़ने वाला किसी दिन सँवर ही जाएगा मिज़ाज ए दोस्त बिल आख़िर सुधर ही जाएगा, मरीज़ ए इश्क़
सहरा के संगीन सफ़र में आबरसानी कम न पड़े सारी आँखें भर कर रखना देखो पानी कम न
शेर बनाना मेंरा ख़ुद को बनाना भी है ये जो है अल्फ़ाज़ में मेरा ज़माना भी है, तुझको