तू क़रीब आए तो क़ुर्बत का यूँ इज़हार करूँ

tu qareeb aaye to

तू क़रीब आए तो क़ुर्बत का यूँ इज़हार करूँ आइना सामने रख कर तेरा दीदार करूँ, सामने तेरे

उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा

uske dushman hai bahut

उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा, इतना सच

बात ऐसी तो करो दिल पे असर कोई करे

baat aisi to karo

बात ऐसी तो करो दिल पे असर कोई करे बिन तेरे कैसे जीया तुझ को ख़बर कोई करे,

हम ने काटी हैं तेरी याद में रातें अक्सर

hum ne kaati hai

हम ने काटी हैं तेरी याद में रातें अक्सर दिल से गुज़री हैं सितारों की बरातें अक्सर, और

तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है

tu is qadar mujhe

तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है तुझे अलग से जो सोचूँ अजीब लगता है, जिसे न

जब लगे ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाये

jab lage zakhm to

जब लगे ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाये है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाये,

है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूबतर कहाँ

hai justazoo ki khoob

है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूबतर कहाँ अब ठहरती है देखिए जा कर नज़र कहाँ हैं दौर

बिगड़ने वाला किसी दिन सँवर ही जाएगा

bigadne wala kisi din

बिगड़ने वाला किसी दिन सँवर ही जाएगा मिज़ाज ए दोस्त बिल आख़िर सुधर ही जाएगा, मरीज़ ए इश्क़

सहरा के संगीन सफ़र में आबरसानी कम न पड़े

sahara ke sangeen safar

सहरा के संगीन सफ़र में आबरसानी कम न पड़े सारी आँखें भर कर रखना देखो पानी कम न

शेर बनाना मेंरा ख़ुद को बनाना भी है

sher banana mera khud

शेर बनाना मेंरा ख़ुद को बनाना भी है ये जो है अल्फ़ाज़ में मेरा ज़माना भी है, तुझको