कभी तो ऐसा भी हो राह भूल जाऊँ मैं

kabhi to aisa bhi ho raah bhool jaaoon main

कभी तो ऐसा भी हो राह भूल जाऊँ मैं निकल के घर से न फिर अपने घर में

आग पानी से डरता हुआ मैं ही था

aag paani se darta hua main hi tha

आग पानी से डरता हुआ मैं ही था चाँद की सैर करता हुआ मैं ही था, सर उठाए

क्यूँ न महकें गुलाब आँखों में ?

kyun na mahke gulab aankhon me

क्यूँ न महकें गुलाब आँखों में ? हम ने रखे हैं ख़्वाब आँखों में, रात आई तो चाँद

शर्मिंदा अपनी जेब को करता नहीं हूँ मैं

sharminda apni jeb ko karta nahin hoon

शर्मिंदा अपनी जेब को करता नहीं हूँ मैं बाज़ार ए आरज़ू से गुज़रता नहीं हूँ मैं, पहचान ही

ऐसे न बिछड़ आँखों से अश्कों की तरह तू

aise na bichhad aankhon se ashko ki tarah

ऐसे न बिछड़ आँखों से अश्कों की तरह तू आ लौट के आ फिर तेरी यादों की तरह

जिस को भी देखो तेरे दर का पता पूछता है

jis ko bhi dekho tere dar ka pata puchta hai

जिस को भी देखो तेरे दर का पता पूछता है क़तरा क़तरे से समुंदर का पता पूछता है,

ख़ज़ाना कौन सा उस पार होगा

khazana kaun saa us paar hoga

ख़ज़ाना कौन सा उस पार होगा वहाँ भी रेत का अम्बार होगा, ये सारे शहर में दहशत सी

सफ़र में अब के अजब तजरबा निकल आया

safar me ab ke azab tajraba nikal aaya

सफ़र में अब के अजब तजरबा निकल आया भटक गया तो नया रास्ता निकल आया, मेरे ही नाम

दरवाज़े के अंदर एक दरवाज़ा और

darwaze ke andar ek darwaz aur

दरवाज़े के अंदर एक दरवाज़ा और छुपा हुआ है मुझ में जाने क्या क्या और ? कोई अंत

सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले

suna hai ye jahan achcha tha pahle

सुना है ये जहाँ अच्छा था पहले ये जो अब दश्त है दरिया था पहले, जो होता कौन