आप का एतिबार कौन करे

aap ka aitibar kaun kare

आप का एतिबार कौन करे रोज़ का इंतिज़ार कौन करे ? ज़िक्र ए मेहर ओ वफ़ा तो हम

उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं

uzr aane me bhi hai aur bulaate bhi nahin

उज़्र आने में भी है और बुलाते भी नहीं बाइस ए तर्क ए मुलाक़ात बताते भी नहीं, मुंतज़िर

ग़ज़ब किया तेरे वादे पे एतिबार किया

gazab kiya tere waade pe aitibar kiya

ग़ज़ब किया तेरे वादे पे एतिबार किया तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया, किसी तरह जो न उस

जाती हुई लड़की को सदा देना चाहिए

jaati hui ladki ko sada dena chahiye

जाती हुई लड़की को सदा देना चाहिए घर हो तो बुरा क्या है पता देना चाहिए, होंटों के

हर चंद जागते हैं पर सोए हुए से हैं

har chand jaagte hai par soye hue se hai

हर चंद जागते हैं पर सोए हुए से हैं सब अपने अपने ख़्वाबों में खोए हुए से हैं,

और कोई चारा न था और कोई सूरत न थी

aur koi chaara na tha aur koi surat na thi

और कोई चारा न था और कोई सूरत न थी उस के रहे हो के हम जिस से

हर एक झोंका नुकीला हो गया है

har ek jhoka nukila ho gaya

हर एक झोंका नुकीला हो गया है फ़ज़ा का रंग नीला हो गया है, अभी दो चार ही

दिन भर के दहकते हुए सूरज से लड़ा हूँ

din bhar ke dahkte hue sooraj se lada hoon

दिन भर के दहकते हुए सूरज से लड़ा हूँ अब रात के दरिया में पड़ा डूब रहा हूँ,

यूँ तो कम कम थी मोहब्बत उस की

yun to kam kam thi mohabbat us ki

यूँ तो कम कम थी मोहब्बत उस की कम न थी फिर भी रिफ़ाक़त उस की, सारे दुख

अभी तो और भी दिन बारिशों के आने थे

abhi to aur bhi din barishon ke aane the

अभी तो और भी दिन बारिशों के आने थे करिश्मे सारे उसे आज ही दिखाने थे, हिक़ारतें ही