दर्द से दिल ने वास्ता रखा

dard se dil ne vaasta rakha

दर्द से दिल ने वास्ता रखा वक़्त बदलेगा हौसला रखा, रो दिए मेरे हाल पे पंछी चुगने जब

उल्फ़तों का ख़ुदा नहीं हूँ मैं

ulfaton ka khuda nahin hoon main

उल्फ़तों का ख़ुदा नहीं हूँ मैं रंज ओ ग़म से जुदा नहीं हूँ मैं, एक अर्सा हुआ गए

बात बच्चों की थी लड़ने को सियाने निकले

baat bachchon kee thi ladne ko sayaane nikale

बात बच्चों की थी लड़ने को सियाने निकले फिर अजब क्या है कि बच्चे भी लड़ाके निकले, ध्यान

काश मैं तुझ सा बेवफ़ा होता

kaash-main-tujh-saa-bewafa-hota

काश मैं तुझ सा बेवफ़ा होता फिर मुझे तुझ से क्या गिला होता ? इश्क़ होता है क्या

इस जादा ए उश्शाक़ की तक़दीर अजब है

is-jaada-e-ushshaaq-kee-taqdeer-azab-hai

इस जादा ए उश्शाक़ की तक़दीर अजब है मुट्ठी में जहाँ पाँव में ज़ंजीर अजब है, बे वक़अत

गले से देर तलक लग के रोएँ अब्र ओ सहाब

gale-se-der-talak-lag-ke-royen-abr-o-sahaab

गले से देर तलक लग के रोएँ अब्र ओ सहाब हटा दिए हैं ज़मान ओ मकाँ के हम

जुनून ए दिल न सिर्फ़ इतना कि एक गुल पैरहन तक है

junun-e-dil-na-sirf-itna-ki-ek-gul-pairahan-tak-hai

जुनून ए दिल न सिर्फ़ इतना कि एक गुल पैरहन तक है क़द ओ गेसू से अपना सिलसिला

आबला पा कोई गुज़रा था जो पिछले सन में

aabla-paa-koi-guzaara-tha-jo-pichhle-san-me

आबला पा कोई गुज़रा था जो पिछले सन में सुर्ख़ काँटों की बहार आई है अब के बन

वो जिस पे तुम्हें शम ए सर ए रह का गुमाँ है

wo-jis-pe-tumhen-sham-e-sar-e-rah-ka-gumaan-hai

वो जिस पे तुम्हें शम ए सर ए रह का गुमाँ है वो शो’ला ए आवारा हमारी ही

सिखाएँ दस्त ए तलब को अदा ए बेबाकी

sikhaayen-dast-e-talab-ko-adaa-e-babakee

सिखाएँ दस्त ए तलब को अदा ए बेबाकी पयाम ए ज़ेर लबी को सला ए आम करें, ग़ुलाम