कोई आरज़ू नहीं है कोई मुद्दआ नहीं है
कोई आरज़ू नहीं है कोई मुद्दआ नहीं है तेरा ग़म रहे सलामत मेरे दिल में क्या नहीं है
General Poetry
कोई आरज़ू नहीं है कोई मुद्दआ नहीं है तेरा ग़म रहे सलामत मेरे दिल में क्या नहीं है
ग़म ए इश्क़ रह गया है ग़म ए जुस्तुजू में ढल कर वो नज़र से छुप गए हैं
मेरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहीं जिसे तेरे ग़म से हो वास्ता वो ख़िज़ाँ
रहा गर्दिशों में हरदम मेरे इश्क़ का सितारा कभी डगमगाई कश्ती कभी खो गया किनारा, कोई दिल के
अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे बेहिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे,
कुछ भी उन पर असर नहीं देखा इश्क़ सा बे हुनर नहीं देखा, उन के जोबन को देख
हमें दावा था देखेंगे वो क्यूँकर याद आते हैं रग ए जाँ बन गए हैं अब फ़ुज़ूँ तर
ये बात उन की तबीअत पे बार गुज़री है कि ज़िंदगी मेरी क्यों ख़ुशगवार गुज़री है ? ख़ुशी
मुझे तलाश थी जिस की वही कभी न मिली हर एक चीज़ मिली एक ज़िंदगी न मिली, तेरी
ये मोहब्बत जो मोहब्बत से कमाई हुई है आग सीने में उसी ने तो लगाई हुई है, एक