दुखों में उस के इज़ाफ़ा भी मैं ही करता हूँ

dukho me us ke izaafa bhi main hi karta hoon

दुखों में उस के इज़ाफ़ा भी मैं ही करता हूँ और इस कमी का इज़ाला भी मैं ही

ये तेरी ख़ल्क़ नवाज़ी का तक़ाज़ा भी नहीं

ye teri khalq nawazi ka takaza bhi nahin

ये तेरी ख़ल्क़ नवाज़ी का तक़ाज़ा भी नहीं कहीं दरिया है रवाँ और कहीं क़तरा भी नहीं, अपने

मसअला ख़त्म हुआ चाहता है

masla khatm hua chahta hai

मसअला ख़त्म हुआ चाहता है दिल बस अब ज़ख़्म नया चाहता है, कब तलक लोग अंधेरे में रहें

सारे भूले बिसरों की याद आती है

saare bhule bisro ki yaad aati hai

सारे भूले बिसरों की याद आती है एक ग़ज़ल सब ज़ख़्म हरे कर जाती है, पा लेने की

कितने अख़बार फ़रोशों को सहाफ़ी लिखा

kitne akhbaar faroshon ko sahafi likha

कितने अख़बार फ़रोशों को सहाफ़ी लिखा ना मुकम्मल को भी ख़ादिम ने इज़ाफ़ी लिखा, तू ने भूले से

पेट की आग बुझाने का सबब कर रहे हैं

pet ki aag bujhaane ka sabab kar rahe hai

पेट की आग बुझाने का सबब कर रहे हैं इस ज़माने के कई मीर मतब कर रहे हैं,

झूठ सच्चाई का हिस्सा हो गया

jhooth sachchai ka hissa ho gaya

झूठ सच्चाई का हिस्सा हो गया एक तरह से ये भी अच्छा हो गया, उस ने एक जादू

दिलों के माबैन शक की दीवार हो रही है

dilon ke maabain shaq kee deewar ho rahi hai

दिलों के माबैन शक की दीवार हो रही है तो क्या जुदाई की राह हमवार हो रही है

फ़राज़ ए इश्क़ तेरी इंतिहा नहीं हुए हम

faraz e ishq teri intiha nahi hue hum

फ़राज़ ए इश्क़ तेरी इंतिहा नहीं हुए हम किसी पे क़र्ज़ थे लेकिन अदा नहीं हुए हम, तेरी

रिश्तों की दलदल से कैसे निकलेंगे

rishton ki daldal se kaise nikalenge

रिश्तों की दलदल से कैसे निकलेंगे हर साज़िश के पीछे अपने निकलेंगे, चाँद सितारे गोद में आ कर