यूँ वो ज़ुल्मत से रहा दस्त ओ गरेबाँ यारो

yun wo zulmat se raha dast o gareban yaaro

यूँ वो ज़ुल्मत से रहा दस्त ओ गरेबाँ यारो उस से लर्ज़ां थे बहुत शब के निगहबाँ यारो,

हम आवारा गाँव गाँव बस्ती बस्ती फिरने वाले

hum aawara gaaon gaaon basti basti firne wale

हम आवारा गाँव गाँव बस्ती बस्ती फिरने वाले हम से प्रीत बढ़ा कर कोई मुफ़्त में क्यूँ ग़म

कम पुराना बहुत नया था फ़िराक़

kam puraana bahut naya tha firaaq

कम पुराना बहुत नया था फ़िराक़ एक अजब रम्ज़ आशना था फ़िराक़, दूर वो कब हुआ निगाहों से

बहुत रौशन है शाम ए ग़म हमारी

bahut raushan hai sham e gam humari

बहुत रौशन है शाम ए ग़म हमारी किसी की याद है हमदम हमारी, ग़लत है ला तअल्लुक़ हैं

मुझे शौक़ था तेरे साथ का

mujhe shauq tha tere sath ka

मुझे शौक़ था तेरे साथ का जो न मिल सका चलो खैर है मेरी ज़िन्दगी भी गुज़र गई

मीर ओ ग़ालिब बने यगाना बने

meer o galib bane yagaana bane

मीर ओ ग़ालिब बने यगाना बने आदमी ऐ ख़ुदा ख़ुदा न बने, मौत की दस्तरस में कब से

शेर होता है अब महीनों में

sher hota hai ab mahino me

शेर होता है अब महीनों में ज़िंदगी ढल गई मशीनों में, प्यार की रौशनी नहीं मिलती उन मकानों

ये सोच कर न माइल ए फ़रियाद हम हुए

ye soch kar na maaiel e fariyad hum hue

ये सोच कर न माइल ए फ़रियाद हम हुए आबाद कब हुए थे कि बर्बाद हम हुए, होता

हम ने सुना था सहन ए चमन में कैफ़ के बादल छाए हैं

hum ne suna tha sahan e chaman me kaif ke badal chhaye hain

हम ने सुना था सहन ए चमन में कैफ़ के बादल छाए हैं हम भी गए थे जी

ये जो शब के ऐवानों में इक हलचल एक हश्र बपा है

ye jo shab ke aewano me ek hulchal ek hashr bapa hai

ये जो शब के ऐवानों में इक हलचल एक हश्र बपा है ये जो अंधेरा सिमट रहा है