एक पल में ज़िंदगी भर की उदासी दे गया
एक पल में ज़िंदगी भर की उदासी दे गया वो जुदा होते हुए कुछ फूल बासी दे गया,
General Poetry
एक पल में ज़िंदगी भर की उदासी दे गया वो जुदा होते हुए कुछ फूल बासी दे गया,
दिल में बंदों के बहुत ख़ौफ़ ए ख़ुदा था पहले ये ज़माना कभी इतना न बुरा था पहले,
कभी पहली बार स्कूल जाने में डर लगता था आज अकेले ही ज़माना घूम लेते हैं, पहले फर्स्ट
जब से उस ने शहर को छोड़ा हर रस्ता सुनसान हुआ अपना क्या है सारे शहर का एक
हर एक शक्ल में सूरत नई मलाल की है हमारे चारों तरफ़ रौशनी मलाल की है, हम अपने
सुख़न के शौक़ में तौहीन हर्फ़ की नहीं की कि हम ने दाद की ख़्वाहिश में शाएरी नहीं
इश्क़ गर हाथ छुड़ाए तो छुड़ाने देना कार ए वहशत पे मगर आँच न आने देना, यूँ भी
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ू ए क़ातिल में है, ऐ
मज्लिस ए ग़म, न कोई बज़्म ए तरब, क्या करते घर ही जा सकते थे आवारा ए शब,
वो चराग़ ए जाँ कि चराग़ था कहीं रहगुज़ार में बुझ गया मैं जो एक शो’लानज़ाद था हवस