बरहना शाख़ों पे कब फ़ाख़ताएँ आती हैं

barhana shakhon pe kab faakhtayen aati hain

बरहना शाख़ों पे कब फ़ाख़ताएँ आती हैं मैं वो शजर हूँ कि जिस में बलाएँ आती हैं, ये

मेरी अना का असासा ज़रूर ख़ाक हुआ

meri anaa ka asasa zarur khaq hua

मेरी अना का असासा ज़रूर ख़ाक हुआ मगर ख़ुशी है कि तेरे हुज़ूर ख़ाक हुआ, मुझे बदन के

शजर तो कब का कट के गिर चुका है

shajar to kab ka kat ke gir chuka hai

शजर तो कब का कट के गिर चुका है परिंदा शाख़ से लिपटा हुआ है, समुंदर साहिलों से

होंठों से लफ़्ज़ ज़ेहन से अफ़्कार छीन ले

hontho se lafz zehan se afqaar chheen le

होंठों से लफ़्ज़ ज़ेहन से अफ़्कार छीन ले मुझ से मेरा वसीला ए इज़हार छीन ले, नस्लें तबाह

लहूलुहान परों पर उड़ान रख देना

lahuluhaan paro par udaan rakh dena

लहूलुहान परों पर उड़ान रख देना शिकस्तगी में नया इम्तिहान रख देना, मेरे बदन पे लबों के निशान

बदन दरीदा हूँ यारो शिकस्ता पा हूँ मैं

badan darida hoon yaaro shikasta paa hoo main

बदन दरीदा हूँ यारो शिकस्ता पा हूँ मैं कि जैसे अपने बुज़ुर्गों की बददुआ हूँ मैं, वो शख़्स

बे हिसी चेहरे की लहजे की उदासी ले गया

be hisi chehre kee lahze kee udaasi le gaya

बे हिसी चेहरे की लहजे की उदासी ले गया वो मेरे अंदर की सारी बद हवासी ले गया,

वो मुहब्बत भी मौसम की तरह निभाता है

wo muhabbat bhi mausam ki tarah nibhata hai

वो मुहब्बत भी मौसम की तरह निभाता है कभी बरसता है कभी बूँद बूँद को तरसाता है, पल

उसे हम याद आते हैं फक़त फ़ुर्सत के लम्हों में

use hum yaad aate hain faqat fursat ke lamhon me

उसे हम याद आते हैं फक़त फ़ुर्सत के लम्हों में मगर ये बात भी सच है उसे फ़ुर्सत

चराग़ों से हवाएँ लड़ रही हैं

charagon se hawayen lad rahi hain

चराग़ों से हवाएँ लड़ रही हैं कि ख़ुद बच्चों से माएँ लड़ रही हैं, नशेमन तो उजाड़े थे