दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के

do-jahan-teri-muhabbat

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार केवो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के, वीराँ है मय-कदा ख़ुम-ओ-साग़र

ये मिस्रा नहीं है वज़ीफ़ा मिरा है…

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ये मिस्रा नहीं है वज़ीफ़ा मिरा हैख़ुदा है मोहब्बत मोहब्बत ख़ुदा है, कहूँ किस तरह मैं कि वो

वो सिवा याद आए भुलाने के बाद

wo-siwa-yaad-aaye

वो सिवा याद आए भुलाने के बाद ज़िंदगी बढ़ गई ज़हर खाने के बाद, दिल सुलगता रहा आशियाने

दिल मेरा मिस्र का बाज़ार भी हो सकता है…

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दिल मेरा मिस्र का बाज़ार भी हो सकता हैकोई धड़कन का ख़रीदार भी हो सकता है, कोई हो

नख्ल ए ममनूअ के रुख दोबारा गया

नख्ल ए ममनूअ के

नख्ल ए ममनूअ के रुख दोबारा गया, मैं तो मारा गयाअर्श से फ़र्श पर क्यूँ उतारा गया ?

नख्ल ए ममनूअ के रुख दोबारा गया, मैं तो मारा गया

nakhl e mamnua ke

नख्ल ए ममनूअ के रुख दोबारा गया, मैं तो मारा गयाअर्श से फ़र्श पर क्यूँ उतारा गया ?

उस ने सुकूत ए शब में भी अपना पयाम रख दिया

us ne sukut e

उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दियाहिज्र की रात बाम पर माह-ए-तमाम रख दिया, आमद-ए-दोस्त की

उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ

usko-juda-hue-zamana

उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआअब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ, ढलती न थी

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करे

wo dil hi kya

वो दिल ही क्या तेरे मिलने की जो दुआ न करेमैं तुझको भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा न

दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती

dil me n ho

दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलतीख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती , कुछ लोग