रवैये मार देते है ये लहज़े मार देते है…

रवैये मार देते है

रवैये मार देते है ये लहज़े मार देते है वही जो जान से प्यारे हैं रिश्ते मार देते

अपनी ज़रूरत के मुताबिक़….

HindiGazals_Featured_Image

अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ लोगो के जज़्बात बदल जाते है, इंसानों की इन्हें फिक़र नहीं मगर ये हैवानो

कहते हैं ईद है आज अपनी भी ईद होती…

कहते हैं ईद है आज

कहते हैं ईद है आज अपनी भी ईद होती हम को अगर मयस्सर जानाँ की दीद होती, क़ीमत

आये जो वो तो दिल के सब अरमान मचल गए…

आये जो वो तो

आये जो वो तो दिल के सब अरमान मचल गएबुझते हुए चिराग़ ए वफ़ा फिर से जल गए,

राज़ कहाँ तक राज़ रहेगा मंज़र-ए-आम पे आएगा

HindiGazals_Featured_Image

राज़ कहाँ तक राज़ रहेगा मंज़र-ए-आम पे आएगाजी का दाग़ उजागर हो कर सूरज को शरमाएगा, शहरों को

पीत करना तो हम से निभाना सजन…

HindiGazals_Featured_Image

पीत करना तो हम से निभाना सजनहम ने पहले ही दिन था कहा ना सजन, तुम ही मजबूर

हिलाल-ए-शाम से बढ़ कर माह-ए-तमाम हुए..

हिलाल-ए-शाम से

लोग हिलाल-ए-शाम से बढ़ कर पल में माह-ए-तमाम हुएहम हर बुर्ज में घटते घटते सुब्ह तलक गुमनाम हुए,

कुछ कहने का वक़्त नहीं कुछ न कहो ख़ामोश रहो

kuch kahne ka waqt

कुछ कहने का वक़्त नहीं ये कुछ न कहो ख़ामोश रहोऐ लोगो ख़ामोश रहो हाँ ऐ लोगो ख़ामोश

किस को पार उतारा तुम ने किस को पार उतारोगे

kis ko-paar-utara

किस को पार उतारा तुम ने किस को पार उतारोगेमल्लाहो तुम परदेसी को बीच भँवर में मारोगे, मुँह

कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेरा

kal-chaudawahi-ki-raat

कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तेराकुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा