हो जाएगी जब तुम से शनासाई ज़रा और

ho jayegi jab tum

हो जाएगी जब तुम से शनासाई ज़रा और बढ़ जाएगी शायद मेरी तन्हाई ज़रा और, क्यूँ खुल गए

जीवन को दुख दुख को आग और आग को पानी कहते…

जीवन को दुख दुख

जीवन को दुख दुख को आग और आग को पानी कहते बच्चे लेकिन सोए हुए थे किस से

दुनियाँ के लोग खुशियाँ मनाने में रह गए…

दुनियाँ के लोग खुशियाँ

दुनियाँ के लोग खुशियाँ मनाने में रह गए हम बदनसीब अश्क बहाने में रह गए, कुछ जाँ निसार

मुहब्बत आज़माती है, मुझे तुम याद आते हो

muhabbat-aazmati-hai mujhe

मुहब्बत आज़माती है, मुझे तुम याद आते हो जुदाई अब सताती है, मुझे तुम याद आते हो, मुहब्बत

अर्ज़ ए गम कभी उसके रूबरू भी हो जाए

arz-e-gam-kabhi

अर्ज़ ए गम कभी उसके रूबरू भी हो जाए शायरी तो होती है, कभी गुफ़्तगू भी हो जाए,

हमसे क़ीमत तो ये पूरी ही लिया करती है

hamse-qimat-to-ye

हमसे क़ीमत तो ये पूरी ही लिया करती है ज़िन्दगी ख़्वाब अधूरे ही दिया करती है, हर मुहब्बत

मुहब्बत कहाँ अब घरों में मिले

muhabbat-kahan-ab-gharo

मुहब्बत कहाँ अब घरों में मिले यहाँ फूल भी पत्थरो में मिले, जो फिरते रहे दनदनाते हुए वही

चंद सिक्को के एवज़ हर ज़ुर्म के सबूत मिटाने वालो…

चंद सिक्को के एवज़

चंद सिक्को के एवज़ हर ज़ुर्म के सबूत मिटाने वालो इक्तिदार के नशे में धूत, लोगो पे ज़ुल्म

सुनो ! दौर ए बेहिस में जब कमाली हार जाता है…

सुनो दौर ए बेहिस

सुनो ! दौर ए बेहिस में जब कमाली हार जाता है हरामी जीत जाते है हलाली हार जाता

ख़बरें हुकुमत की क़ब्रें आवाम की

khabren-huqumat-ki-qabren

ख़बरें हुकुमत की क़ब्रें आवाम की हमको नहीं है लालच तुम्हारे इनाम की, बोया है तुमने जो भी