इंशा जी उठा अब कूच करो, इस शहर में जी का लगाना क्या…

insha jee utha ab kooch karo

इंशा जी उठा अब कूच करो, इस शहर में जी का लगाना क्या वहशी को सुकूं से क्या

शिकवा भी ज़फ़ा का कैसे करे एक नाज़ुक सी दुश्वारी है…

shikwa bhi zafa ka kaise kare

शिकवा भी ज़फ़ा का कैसे करे एक नाज़ुक सी दुश्वारी है आगाज़ ए वफ़ा ख़ुद हमने किया था

उर्दू है मेरा नाम मैं ख़ुसरो की पहेली

urdu-hai-mera-naam

उर्दू है मेरा नाम मैं ख़ुसरो की पहेली मैं मीर की हमराज़ हूँ ग़ालिब की सहेली, दक्कन के

क़र्ज़ जाँ का उतारने के लिए

qarz-jaan-utarne-ke

क़र्ज़  जाँ का उतारने के लिए मैं जीया ख़ुद को मारने के लिए,   मुझे जलना पड़ा दीये

ये ज़र्द पत्तों की बारिश मेरा ज़वाल नहीं…

sabz mausam me zard hawa dee usne

ये ज़र्द पत्तों की बारिश मेरा ज़वाल नहीं मेरे बदन पे किसी दूसरे की शाल नहीं, उदास हो

वही ताज है वही तख़्त है वही ज़हर है वही जाम है…

wahi taaz hai wahi takht hai wahi zahar hai

वही ताज है वही तख़्त है वही ज़हर है वही जाम है ये वही ख़ुदा की ज़मीन है

थी जिसकी जुस्तज़ू वो हकीक़त नहीं मिली…

thi jiski justzoo wo haqiqat nahi mili

थी जिसकी जुस्तज़ू वो हकीक़त नहीं मिली इन बस्तियों में हमको रफ़ाक़त नहीं मिली, अबतक हूँ इस गुमाँ

अब जो बिछडे हैं, तो बिछडने की शिकायत कैसी…

ab jo bichhde hai to bichhadne ki shikayat kaisi

अब जो बिछडे हैं, तो बिछडने की शिकायत कैसी मौत के दरिया में उतरे तो जीने की इजाजत

कौन कहता है शरारत से तुम्हे देखते है…

kaun kahta hai sharart se tumhe dekhte hai

कौन कहता है शरारत से तुम्हे देखते है जान ए मन हम तो मुहब्बत से तुम्हे देखते है,

तू समझता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे…

tu samjhta hai ki ham rishto ki duhaai denge

तू समझता है कि रिश्तों की दुहाई देंगे हम तो वो हैं तेरे चेहरे से दिखाई देंगे, हम