ये संसद है यहाँ भगवान का भी बस नहीं चलता…

ye sansad hai yahan bhagwan ka bhi bas nahi chalta

ये संसद है यहाँ भगवान का भी बस नहीं चलता जहाँ पीतल ही पीतल हो वहाँ पारस नहीं

अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं..

hamare gaaon me chhappar bhi sab mil kar uthate hai

अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं जो शायर हैं वो महफ़िल में दरी चादर उठाते

उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले हैं…

unse miliye jo fer badal wale hai

उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले हैं हमसे मत बोलिए हम लोग ग़ज़ल वाले हैं, कैसे शफ़्फ़ाफ़

हर एक आवाज़ अब उर्दू को फ़रियादी बताती है..

urdu ko sab fariyadi batate hai

हर एक आवाज़ अब उर्दू को फ़रियादी बताती है यह पगली फिर भी अब तक ख़ुद को शहज़ादी

चराग़ अपनी थकन की कोई सफ़ाई न दे…

charag apni thakan ki koi safai n de

चराग़ अपनी थकन की कोई सफ़ाई न दे वो तीरगी है कि अब ख़्वाब तक दिखाई न दे,

एक टूटी हुई ज़ंजीर की फ़रियाद हैं हम…

ek tuti hui zanjir ki fariyad hai ham

एक टूटी हुई ज़ंजीर की फ़रियाद हैं हम और दुनिया ये समझती है कि आज़ाद हैं हम, क्यूँ

जिस्म का बोझ उठाए हुए चलते रहिए…

zindagi ka bojh uthaye hue chalte rahiye

जिस्म का बोझ उठाए हुए चलते रहिए धूप में बर्फ़ की मानिंद पिघलते रहिए, ये तबस्सुम तो है

दुनियाँ कहीं जो बनती है मिटती ज़रूर है…

duniyan kahin jo banti hai mitati zarur hai

दुनियाँ कहीं जो बनती है मिटती ज़रूर है परदे के पीछे कोई न कोई ज़रूर है, जाते है

तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए…

tu gazal ban ke utar baat muqammal ho jaaye

तू ग़ज़ल बन के उतर बात मुकम्मल हो जाए मुंतज़िर दिल की मुनाजात मुकम्मल हो जाए, उम्र भर

हाल ए दिल पे ही शायर बुनते है गज़ल…

haal e dil pe hi shayar bunte hai gazal

हाल ए दिल पे ही शायर बुनते है गज़ल जो बात दिल की समझते है वो सुनते है