सता लें हमको दिलचस्पी जो है उनकी सताने में…

sata le hamko jo dilchaspi hai unhe hamko satane me

सता लें हमको दिलचस्पी जो है उनकी सताने में हमारा क्या वो हो जाएँगे रुस्वा ख़ुद ज़माने में,

हिज़रतो का ज़माना भी क्या ज़माना है…

hizrato ka zamana bhi kya zamana hai

हिज़रतो का ज़माना भी क्या ज़माना है उन्ही से दूर है जिनके लिए कमाना है, ख़ुशी ये है

समझ रहे थे कि अपनी सुधर गई दुनियाँ…

समझ रहे थे कि अपनी सुधर गई दुनियाँ हमें तो मुफ़्त में बदनाम कर गई दुनियाँ, मुतालबों से

अश्क ओ खूं घुलते है तब दीदा ए तर बनती है…

ashk o khoo ghulte hai tab deeda e tar banti hai

अश्क ओ खूं घुलते है तब दीदा ए तर बनती है दास्ताँ इश्क़ में मरने से अमर बनती

सभी कहें मेरे गम ख़्वार के अलावा भी…

koi to baat karo yaar ke alawa bhi

सभी कहें मेरे गम ख़्वार के अलावा भी कोई तो बात करो यार के अलावा भी, बहुत से

हर मुलाक़ात में लगते हैं वो बेगाने से…

har mulaqat me lagte hai wo begane se

हर मुलाक़ात में लगते हैं वो बेगाने से फ़ाएदा क्या है भला ऐसों के याराने से, कुछ जो

तुम हो जब मेरे लिए हैं दो जहाँ मेरे लिए…

tum ho jab mere liye do jahan hai mere liye

तुम हो जब मेरे लिए हैं दो जहाँ मेरे लिए ये ज़मीं मेरे लिए ये आसमाँ मेरे लिए,

सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते…

sar-jis-pe-na-jhuk

सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते हर दर पे जो झुक जाए उसे सर

मैं दहशतगर्द था मरने पे बेटा बोल सकता है…

main dahshatgard tha marne pe beta bol sakta hai

मैं दहशतगर्द था मरने पे बेटा बोल सकता है हुकूमत के इशारे पे तो मुर्दा बोल सकता है,

मुहब्बत करने वालों में ये झगड़ा डाल देती है…

muhabbat karne walo me jhagda daal deti hai

मुहब्बत करने वालों में ये झगड़ा डाल देती है सियासत दोस्ती की जड़ में मट्ठा डाल देती है,