किस एहतियात से उसने नज़र बचाई है

kis-ehtiyat-se-usne

किस एहतियात से उसने नज़र बचाई है ज़माना अब भी समझता है आशनाई है, मेरे अज़ीज़ है इसका

उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर

umr-bhar-chalte-rahe

उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर परवरिश पाई है अपने ख़ून ही की धार पर,

जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी

jis-taraf-chahoon-pahunch

जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी मैं तो आवाज़ हूँ आवाज़ की हिजरत कैसी ? सुनने वालों

किए वादों का निभाना बाक़ी है

kiye-waado-ka-nibhana

किए वादों का निभाना बाक़ी है और अभी उनको मनाना बाक़ी है, मुझे अपना भी समझना बाक़ी है

बात करते है ख़ुशी की भी तो रंज़ के साथ

baat-karte-hai-khushi

बात करते है ख़ुशी की भी तो रंज़ के साथ वो हँसाते भी है ऐसा कि रुला देते

कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को

kabhi-kaha-na-kisi

कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को न जाने कैसे ख़बर हो गई ज़माने को, दुआ बहार

साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं

saath-chalte-aa-rahe

साथ चलते आ रहे हैं पास आ सकते नहीं एक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं,

हुस्न ए मह गरचे बहंगाम ए कमाल अच्छा है

husn-e-mah-garche

हुस्न ए मह गरचे बहंगाम ए कमाल अच्छा है उससे मेरा मह ए ख़ुर्शीद जमाल अच्छा है, बोसा

जुज़ तेरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे

juz-tere-koi-bhi

जुज़ तेरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे तू कहाँ है मगर ऐ दोस्त पुराने मेरे ?

यकुम जनवरी है नया साल है

yakum-janwari-hai naya

यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है, बचाए ख़ुदा शर की ज़द से