मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से

Mushkil hai ki ab

मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से दस्तार पे बात आ गई होती हुई सर

है हकीक़त अज़ाब रहने दो

Hai haqiqat azab rahne

है हकीक़त अज़ाब रहने दो टूट जाएगा ख़्वाब रहने दो, कब सज़ावार हूँ इनायत का यूँ ही ज़ेर

बहुत मुमकिन था हम दो जिस्म और एक जान हो जाते

Bahut Mumkin tha ham

बहुत मुमकिन था हम दो जिस्म और एक जान हो जाते मगर दो जिस्म सिर्फ़ एक जान से

तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ

tu phool ki manind

तू फूल की मानिंद न शबनम की तरह आ अब के किसी बेनाम से मौसम की तरह आ,

दुआ का टूटा हुआ हर्फ़ सर्द आह में है

Dua ka tuta hua

दुआ का टूटा हुआ हर्फ़ सर्द आह में है तेरी जुदाई का मंज़र अभी निगाह में है, तेरे

तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे इश्क़ तेरा सताए तो मैं क्या करूँ ?

Teri Surat Nigahon me

तेरी सूरत निगाहों में फिरती रहे इश्क़ तेरा सताए तो मैं क्या करूँ ? कोई इतना तो आ

एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा

एक सूरज था कि

एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा, किस

जुस्तुजू खोए हुओं की उम्र भर करते रहे

जुस्तुजू खोए हुओं की

जुस्तुजू खोए हुओं की उम्र भर करते रहे चाँद के हमराह हर शब सफ़र करते रहे, रास्तों का

वो जो दिल में तेरा मुक़ाम है

वो जो दिल में तेरा मुक़ाम है

वो जो दिल में तेरा मुक़ाम है किसी और को वो देना नहीं, वो जो रिश्ता तुझ से

दिल की दुनिया में दुनिया न आये कभी

दिल की दुनिया में

दिल की दुनिया में दुनिया न आये कभी मेरे मौला ये दुनिया न भाये कभी, जिस को क़ुरआँ