बूढ़ा टपरा, टूटा छपरा और उस पर बरसातें सच
बूढ़ा टपरा, टूटा छपरा और उस पर बरसातें सच उसने कैसे काटी होगी, लंबी लंबी राते सच ?
General Poetry
बूढ़ा टपरा, टूटा छपरा और उस पर बरसातें सच उसने कैसे काटी होगी, लंबी लंबी राते सच ?
इश्क़ में ग़ैरत ए जज़्बात ने रोने न दिया वर्ना क्या बात थी किस बात ने रोने न
सज़ा पे छोड़ दिया कुछ जज़ा पे छोड़ दिया हर एक काम को मैं ने ख़ुदा पे छोड़
तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी ये तेरी तरह मुझ से तो शरमा न सकेगी, मैं बात
काश ! एक तो ख्वाइश पूरी हो मेरी इबादत के बगैर वो मुझे अपने गले से लगाए मेरी
मेरी एक छोटी सी कोशिश तुझ को पाने के लिए बन गई है मसअला सारे ज़माने के लिए,
अकेले छोड़ जाते हो ये तुम अच्छा नहीं करते हमारा दिल दुखाते हो ये तुम अच्छा नहीं करते,
क़िस्से मेरी आशुफ़्ता नवाई के बहुत थे चर्चे तेरी अंगुश्त नुमाई के बहुत थे, दुनिया की तलब ही
नज़र नज़र से मिला कर कलाम कर आया ग़ुलाम शाह की नींदें हराम कर आया, कई चराग़ हवा
वो मेरे ख़्वाब की ताबीर तो बताए मुझे मैं धूप में हूँ मगर ढूँढते हैं साए मुझे, मैं