जहाँ वहम ओ गुमाँ हो जाएगा क्या
जहाँ वहम ओ गुमाँ हो जाएगा क्या यहाँ सब कुछ धुआँ हो जाएगा क्या ? सितारे धूल और
Gazals
जहाँ वहम ओ गुमाँ हो जाएगा क्या यहाँ सब कुछ धुआँ हो जाएगा क्या ? सितारे धूल और
कोई साया अच्छे साईं धूप बहुत है मर जाऊँगा अच्छे साईं धूप बहुत है, साँवली रुत में ख़्वाब
उजाड़ आँखों में रत जगों का अज़ाब उतरा है नीम शब को जो दर्द जागा है शाम ढलते
वो किसी भी अक्स ए जमाल में नहीं आएगा वो जवाब है तो सवाल में नहीं आएगा, नहीं
गलियों की बस ख़ाक उड़ा के जाना है हम को भी आवाज़ लगा के जाना है, रस्ते में
जिन्हें हम कह नहीं पाए वो बातें याद आती हैं गुज़शता ना मुलाक़ातों की यादें याद आती हैं,
यादें पागल कर देती हैं बातें पागल कर देती हैं, चेहरा होश उड़ा देता है आँखें पागल कर
तेरा ख़याल बहुत देर तक नहीं रहता कोई मलाल बहुत देर तक नहीं रहता, उदास करती है अक्सर
देखे हुए किसी को बहुत दिन गुज़र गए इस दिल की बेबसी को बहुत दिन गुज़र गए, हर
आप की आँख अगर आज गुलाबी होगी मेरी सरकार बड़ी सख़्त ख़राबी होगी, मोहतसिब ने ही पढ़ा होगा