बहुत रोया वो हमको याद कर के…
बहुत रोया वो हमको याद कर केहमारी ज़िन्दगी बर्बाद कर के, पलट कर फिर यही आ जाएँगे हमवो
Gazals
बहुत रोया वो हमको याद कर केहमारी ज़िन्दगी बर्बाद कर के, पलट कर फिर यही आ जाएँगे हमवो
किसी रोज़ शाम के वक़्तसूरज के आराम के वक़्तमिल जाए जो साथ तेराहाथ में ले कर हाथ तेरादूर
जिसको देखो वही इक्तिदार चाहता हैयार चाहता है प्रोटोकॉल मर्ज़ी का, हर कोई चाहता है बनना सियासतदाँसियासत की
ये लाल डिबिया में जो पड़ी है वो मुँह दिखाई पड़ी रहेगीजो मैं भी रूठा तो सुबह तक
तेरे उकताते हुए लम्स से महसूस हुआअब बिछड़ने का तेरे वक़्त हुआ चाहता है, अजनबियत तेरे लहज़े की
इससे पहले कि कोई इनको चुरा ले, गिन लोतुमने जो दर्द किये मेरे हवाले, गिन लो चल के
हरीस दिल ने ज़माना कसीर बेचा हैकिसी ने ज़िस्म, किसी ने ज़मीर बेचा है, नहीं रही बशरियत की
मेरा नहीं तो वो अपना ही कुछ ख्याल करेउसे कहो कि ताअल्लुक़ को फिर बहाल करे मिले तो
मुझे ख़बर नहीं कितने ख़सारे रखे गएमेरे नसीब में सब गम तुम्हारे रखे गए हमारे साथ मुहब्बत में
मैं रूठा था मुहब्बत सेकि मुहब्बत कुछ नहीं होती, मुहब्बत तो फ़क़त दिखवा हैकि मुहब्बत झूठ है लोगो,