राब्ता ज़िस्म का जब रूह से कट जाता है

rabta-zism-ka-jab

राब्ता ज़िस्म का जब रूह से कट जाता है आदमी मुख्तलिफ़ हालात में बँट जाता है, देख कर

उम्र कहते है जिसे साँसों की एक जंज़ीर है

halaat the kharab yaa main kharab tha

उम्र कहते है जिसे साँसों की एक जंज़ीर है चश्म ए बीना में हर के लम्हा नई तस्वीर

दस्तरस में न हो हालात तो फिर क्या कीजिए

sata le hamko jo dilchaspi hai unhe hamko satane me

दस्तरस में न हो हालात तो फिर क्या कीजिए वक़्त दिखलाए करिश्मात तो फिर क्या कीजिए, साहब ए

हमें कोई गम न था, गम ए आशिकी से पहले

hame-koi-gam-na

हमें कोई गम न था, गम ए आशिकी से पहले न थी दुश्मनी किसी से, तेरी दोस्ती से

जाने क्यूँ आजकल तुम्हारी कमी अखरती है बहुत

jaane-kyun-aajkal-tumhari

जाने क्यूँ आजकल तुम्हारी कमी अखरती है बहुत यादो के बंद कमरे में ज़िन्दगी सिसकती है बहुत, पनपने

ये सोचा नहीं है कि किधर जाएँगे…

ye socha nahi hai ki kidhar jayenge

ये सोचा नहीं है कि किधर जाएँगे मगर हम अब यहाँ से गुज़र जाएँगे, इसी खौफ़ से रातों

भीतर भीतर आग भरी है बाहर बाहर पानी है

bhitar-bhitar-aag-bhari

भीतर भीतर आग भरी है बाहर बाहर पानी है तेरी मेरी, मेरी तेरी सब की यही कहानी है,

ऐ मेरी क़ौम के लोगो ज़रा होशियार हो जाओ

ae-meri-qaum-ke

ऐ मेरी क़ौम के लोगो ज़रा होशियार हो जाओउठो अब नींद से जागो के अब बेदार हो जाओ,

कुछ चलेगा ज़नाब, कुछ भी नहीं

kuch-chalega-zanab-kuch

कुछ चलेगा ज़नाब, कुछ भी नहीं चाय, कॉफ़ी, शराब, कुछ भी नहीं, चुप रहे तो कली लगे वो

हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है

har rishta yahan bas chaar din ki kahani hai

हर रिश्ता यहाँ बस चार दिन की कहानी है अंज़ाम ए वफ़ा आँखों से बहता हुआ पानी है,