पढ़ती रहती हूँ मैं सारी चिट्ठियाँ

padhti-rahti-hoon-main

पढ़ती रहती हूँ मैं सारी चिट्ठियांरात है और है तुम्हारी चिट्ठियां, आओ तो पढ़ कर सुनाऊँगी तुम्हेंलिख रखी

वो जो दिल के क़रीब होते है…

pyas jo umr bhar naa bujhi purani hogi

वो जो दिल के क़रीब होते है लोग वो भी अज़ीब होते है, पढ़ना लिखना जो जानते न

हम वक़्त ए मौत को तो हरगिज़ टाल न पाएँगे

waqt e maut ko hargiz taal naa payenge

हम वक़्त ए मौत को तो हरगिज़ टाल न पाएँगे हम ख़ाली हाथ आए है और ख़ाली हाथ

हमने कैसे यहाँ गुज़ारी है

hamne-kaise-yahan-guzari

हमने कैसे यहाँ गुज़ारी है अश्क खुनी है आह ज़ारी है, हम ही पागल थे जान दे बैठे

याद आता है मुझे छोड़ के जाने वाला

yaad aata hai mujhe chhod ke jaane wala

याद आता है मुझे छोड़ के जाने वाला मेरी हर शाम को रंगीन बनाने वाला, आज रो कर

मैंने माना कि तुम ज़ालिम नहीं हो मगर

maine-mana-ki-tum

मैंने माना कि तुम ज़ालिम नहीं हो मगर क्या मालूम था कि हम तुमसे डर जाएँगे, तेरी याद

बात करते है यहाँ क़तरे भी समन्दर की तरह

baat karte hai yahan qatre bhi samndar ki tarah

बात करते है यहाँ क़तरे भी समन्दर की तरह अब लोग ईमान बदलते है कैलेंडर की तरह, कोई

क्यूँ रवा रखते हो मुझसे सर्द मेहरी बे सबब

kyun-ranva-rakhte-ho

क्यूँ रवा रखते हो मुझसे सर्द मेहरी बे सबब बीच में लाना पड़े थाना कचहरी बे सबब, मैंने

दुनियाँ में करने पड़ते है इतने समझौते

duniya-me-karne-padte

दुनियाँ में करने पड़ते है इतने समझौते कि मौत से पहले कई बार मर जाते है हम, ज़िन्दगी

बस इतनी बात पे बीबी खफ़ा है शौहर से

bas itni si baat pe bibi khafa hai shauhar se

बस इतनी बात पे बीबी खफ़ा है शौहर से कि माँ के हाथ पे ला कर दिहाड़ी रखता