आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया

aarzoo-ko-dil-hi

आरज़ू को दिल ही दिल में घुट के रहना आ गया और वो ये समझे कि मुझ को

जताए हक़ न कैसे हम भला इक़रार पे उनके

jataye-haq-na-kaise

जताए हक़ न कैसे हम भला इक़रार पे उनके हमें फिर भी नाज़ होता है हसीं इंकार पे

ज़िंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना

zindagi-di-hai-to

ज़िंदगी दी है तो जीने का हुनर भी देना पाँव बख़्शें हैं तो तौफ़ीक़ ए सफ़र भी देना,

इस बहते हुए लहू में मुझे तो

is bahte hue lahoo me

इस बहते हुए लहू में मुझे तो बस इन्सान नज़र आ रहा है लानत हो तुम पे तुम्हे

किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई मेरे ख़ुदा

kis simt chal padi hai khudai mere khuda

किस सिम्त चल पड़ी है खुदाई मेरे ख़ुदा नफ़रत ही अब दे रही है दिखाई मेरे ख़ुदा, अम्न

जिसने भी मुहब्बत का गीत गया है

jisne-bhi-muhabbat-ka

जिसने भी मुहब्बत का गीत गया है ज़िन्दगी का लुत्फ़ उसने ही उठाया है, मौसम गर्मी का हो

दुनिया में यूँ भी हमने गुज़ारी है ज़िन्दगी

duniya-me-yun-bhi

दुनिया में यूँ भी हमने गुज़ारी है ज़िन्दगी अपनी कहाँ है जैसे उधारी है ज़िन्दगी, आवाज़ मुझको ना

संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है

sansar-ki-har-shay

संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है एक धुंध से आना है एक धुंध में जाना

मर चुका हूँ कई बार फिर भी कई बार मरना है

mar-chuka-hoo-kai

मर चुका हूँ कई बार फिर भी कई बार मरना है मरने से पहले ज़िन्दगी को रग रग

घबराने से मसले हल नहीं होते

ghabrane-se-masle-hal

घबराने से मसले हल नहीं होते जो आज है वो कल नहीं होते, याद रखना हमेशा इस बात