किस की तलाश है किस के असर में हैं…

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किस की तलाश है किस के असर में हैं जब से चले हैं घर से मुसलसल सफ़र में

मेरे दिल के अरमां रहे रात जलते…

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मेरे दिल के अरमां रहे रात जलते रहे सब करवट पे करवट बदलते, यूँ हारी है बाज़ी मुहब्बत

कुछ इस तरह से इबादत खफ़ा हुई हमसे

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कुछ इस तरह से इबादत खफ़ा हुई हमसे नमाज़ ए इश्क बहुत कम अदा हुई हमसे, गरीब आँखों

कश्ती चला रहा है मगर किस अदा के साथ…

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कश्ती चला रहा है मगर किस अदा के साथ हम भी न डूब जाएँ कहीं ना ख़ुदा के

ये है मयकदा यहाँ रिंद हैं यहाँ सब का साक़ी इमाम है

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ये है मयकदा यहाँ रिंद हैं यहाँ सब का साक़ी इमाम है ये हरम नहीं है ऐ शैख़

न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम

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न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या

किसी से भी नहीं हम सब्र की तलक़ीन लेते है…

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किसी से भी नहीं हम सब्र की तलक़ीन लेते है हमें मिलती नहीं जो चीज उसको छीन लेते

आँखे बन जाती है सावन की घटा शाम के बाद

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आँखे बन जाती है सावन की घटा शाम के बाद लौट जाता है अगर कोई खफ़ा शाम के

मुझको पागल कहने वाला ख़ुद ही पागल हो जाएगा…

मुझको पागल कहने वाला

कोई हसीन मंज़र आँखों से जब ओझल हो जाएगा मुझको पागल कहने वाला ख़ुद ही पागल हो जाएगा,

तभी तो मैं मुहब्बत का कही हवालाती नहीं होता…

तभी तो मैं मुहब्बत

तभी तो मैं मुहब्बत का कही हवालाती नहीं होता जहाँ अपने सिवा कोई शख्स मुलाक़ाती नहीं होता, गिरफ्तार