तुम हो जब मेरे लिए हैं दो जहाँ मेरे लिए…

tum ho jab mere liye do jahan hai mere liye

तुम हो जब मेरे लिए हैं दो जहाँ मेरे लिए ये ज़मीं मेरे लिए ये आसमाँ मेरे लिए,

सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते…

sar-jis-pe-na-jhuk

सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते हर दर पे जो झुक जाए उसे सर

मैं दहशतगर्द था मरने पे बेटा बोल सकता है…

main dahshatgard tha marne pe beta bol sakta hai

मैं दहशतगर्द था मरने पे बेटा बोल सकता है हुकूमत के इशारे पे तो मुर्दा बोल सकता है,

मुहब्बत करने वालों में ये झगड़ा डाल देती है…

muhabbat karne walo me jhagda daal deti hai

मुहब्बत करने वालों में ये झगड़ा डाल देती है सियासत दोस्ती की जड़ में मट्ठा डाल देती है,

ये संसद है यहाँ भगवान का भी बस नहीं चलता…

ye sansad hai yahan bhagwan ka bhi bas nahi chalta

ये संसद है यहाँ भगवान का भी बस नहीं चलता जहाँ पीतल ही पीतल हो वहाँ पारस नहीं

अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं..

hamare gaaon me chhappar bhi sab mil kar uthate hai

अजब दुनिया है नाशायर यहाँ पर सर उठाते हैं जो शायर हैं वो महफ़िल में दरी चादर उठाते

उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले हैं…

unse miliye jo fer badal wale hai

उनसे मिलिए जो यहाँ फेर बदल वाले हैं हमसे मत बोलिए हम लोग ग़ज़ल वाले हैं, कैसे शफ़्फ़ाफ़

हर एक आवाज़ अब उर्दू को फ़रियादी बताती है..

urdu ko sab fariyadi batate hai

हर एक आवाज़ अब उर्दू को फ़रियादी बताती है यह पगली फिर भी अब तक ख़ुद को शहज़ादी

चराग़ अपनी थकन की कोई सफ़ाई न दे…

charag apni thakan ki koi safai n de

चराग़ अपनी थकन की कोई सफ़ाई न दे वो तीरगी है कि अब ख़्वाब तक दिखाई न दे,

एक टूटी हुई ज़ंजीर की फ़रियाद हैं हम…

ek tuti hui zanjir ki fariyad hai ham

एक टूटी हुई ज़ंजीर की फ़रियाद हैं हम और दुनिया ये समझती है कि आज़ाद हैं हम, क्यूँ