एक बरस और कट गया शारिक़

ek baras aur kat gaya shariq

एक बरस और कट गया शारिक़ रोज़ साँसों की जंग लड़ते हुए, सब को अपने ख़िलाफ़ करते हुए

मुबारक मुबारक नया साल सब को

mubarak mubarak naya saal sab ko

मुबारक मुबारक नया साल सब को न चाहा था हम ने तू हम से जुदा हो, मगर किस

गुफ़्तुगू जो होती है साल ए नौ से अम्बर की

guftagoo jo hoti hai saal e nau se ambar kee

गुफ़्तुगू जो होती है साल ए नौ से अम्बर की गर्म होने लगती हैं सर्दियाँ दिसम्बर की, जाने

सहर ने मसर्रत का नग़्मा सुनाया

sahar ne masarrat ka nagma sunaya

सहर ने मसर्रत का नग़्मा सुनाया फ़ज़ा ने गुलिस्ताँ का दामन सजाया, हवाओं ने अख़्लाक़ का गीत गाया

हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे

hum bichhad ke tum se baadal kee tarah

हम बिछड़ के तुम से बादल की तरह रोते रहे थक गए तो ख़्वाब की दहलीज़ पर सोते

दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं

dil ke tatar me yaadon ke ab aahoo bhi nahin

दिल के तातार में यादों के अब आहू भी नहीं आईना माँगे जो हम से वो परी रू

वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं

wo dilnawaz hai lekin nazar shanas nahin

वो दिलनवाज़ है लेकिन नज़र शनास नहीं मेरा इलाज मेरे चारागर के पास नहीं, तड़प रहे हैं ज़बाँ

कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें

kuch yaadgaar e shahar e sitamgar hi le chale

कुछ यादगार ए शहर ए सितमगर ही ले चलें आए हैं इस गली में तो पत्थर ही ले

क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे

kya zamana tha ki hum roz mila karte the

क्या ज़माना था कि हम रोज़ मिला करते थे रात भर चाँद के हमराह फिरा करते थे, जहाँ

मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना

mujhe tum shohraton ke darmiyan gumnam

मुझे तुम शोहरतों के दरमियाँ गुमनाम लिख देना जहाँ दरिया मिले बे आब मेरा नाम लिख देना, ये