संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है
संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है एक धुंध से आना है एक धुंध में जाना
संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है एक धुंध से आना है एक धुंध में जाना
मर चुका हूँ कई बार फिर भी कई बार मरना है मरने से पहले ज़िन्दगी को रग रग
घबराने से मसले हल नहीं होते जो आज है वो कल नहीं होते, याद रखना हमेशा इस बात
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है,
बात इधर उधर तो बहुत घुमाई जा सकती है पर सच्चाई भला कब तक छुपाई जा सकती है
अब मुहब्बत का इरादा बदल जाना भी मुश्किल है उन्हें खोना भी मुश्किल,उन्हें पाना भी मुश्किल है, ज़रा
रह के मक्कारों में मक्कार हुई है दुनिया मेरे दुश्मन की तरफ़दार हुई है दुनिया, पाक दामन थी
ऐसा अपनापन भी क्या जो अज़नबी महसूस हो साथ रह कर भी गर मुझे तेरी कमी महसूस हो,
गर्मी ए हसरत ए नाकाम से जल जाते हैं हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं,
गरेबाँ दर गरेबाँ नुक्ता आराई भी होती है बहार आए तो दीवानों की रुस्वाई भी होती है, हम