तुम सोज़ ए तमन्ना क्या जानों

तुम सोज़ ए तमन्ना क्या जानों
तुम दर्द ए मुहब्बत क्या समझों ?

तुम दिल का तड़पना क्या जानों ?
तुम दूर खड़े तकते ही रहे
और डूबने वाले डूब गए,

साहिल को तुम मंज़िल समझे
तुम लज्ज़त ए दरिया क्या जानों ?

सौर बार अगर तुम रूठ गए
हम तुमको मना ही लेते थे मगर
एक बार अगर हम रूठ गए
तुम हमको मनाना भूल गए,

दुनिया ए रफ़ाक़त में शायद
तुम पहले पहले आये हो
तुम डूबती नब्ज़ें क्या समझो ?
तुम दिल का धड़कना क्या जानो ?


Discover more from Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply