तुझे इस क़दर है शिकायतें
कभी सुन ले मेरी हिकायते,
तुझे गर न कोई मलाल हो
मैं भी एक तुझसे गिला करूँ ?
तू नमाज़ ए इश्क़ है जान ए जाँ
तुझे रात ओ दिन मैं अदा करूँ,
तेरा प्यार तेरी मुहब्बते
मेरी ज़िन्दगी की इबादतें,
जो हो ज़िस्म ओ जाँ में रवां दवां
उसे कैसे ख़ुद से जुदा करूँ ?
तू है दिल में, तू ही नज़र में है
तू है शाम तू ही सहर में है,
जो निज़ात चाहूँ हयात से
तुझे भूलने की दुआ करूँ..!!
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