इख़्तियार ए संजीदगी अक्सर जवानी उजाड़ देती है

इख़्तियार ए संजीदगी
अक्सर जवानी उजाड़ देती है

रवानी ए ज़िन्दगी को
वहशत उजाड़ देती है,

एक छोटी सी गलती भी
बनी कहानी बिगाड़ देती है,

कम उम्रो में ज़िम्मेदारी
बचपन बिगाड़ देती है,

इख़्तियार ए संजीदगी
अक्सर जवानी उजाड़ देती है..!!


Discover more from Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply