है ख़ुशी से किस तरह ग़म का ख़सारा देखिए

है ख़ुशी से किस तरह ग़म का ख़सारा देखिए
आसमान ए यास पर उगता सितारा देखिए,

आप गर चाहें तो ये जिंस ए वफ़ा भी आम हो
रिश्ता ए मुबहम है अब एक इस्तिआरा देखिए,

ये हिसार ए इश्क़ भी है एक हिसार ए ख़ुशनुमा
ख़ुद चुना है गिर्द अपने ईंट गारा देखिए,

था यक़ीन लंगड़ा उधर और प्यार अंधा था इधर
पाँव लंगड़े को मिला अंधे को तारा देखिए,

शम्स छुप सकता है जिस के एक इशारे से अगर
चाँद भी हो सकता है फिर पारा पारा देखिए..!!

~चंद्रशेखर पाण्डेय शम्स

जब शहर ए दिल में पड़ गए उस ज़र बदन के पाँव

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