तेरी अंजुमन में ज़ालिम अजब एहतिमाम देखा
कहीं ज़िंदगी की बारिश कहीं क़त्ल ए आम देखा,
मेरी अर्ज़ ए शौक़ पढ़ लें ये कहाँ उन्हें गवारा
वहीं चाक कर दिया ख़त जहाँ मेरा नाम देखा,
बड़ी मिन्नतों से आ कर वो मुझे मना रहे हैं
मैं बचा रहा हूँ दामन मेरा इंतिक़ाम देखा,
ऐ शकील रूह परवर तेरी बेख़ुदी के नग़्मे
मगर आज तक न हम ने तेरे लब पे जाम देखा..!!
~शकील बदायूनी
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