वैसे मैंने दुनिया में क्या देखा है
तुम कहते हो तो फिर अच्छा देखा है,
मैं उस को अपनी वहशत तोहफ़े में दूँ
हाथ उठाए जिस ने सहरा देखा है,
बिन देखे उस की तस्वीर बना लूँगा
आज तो मैंने उस को इतना देखा है,
एक नज़र में मंज़र कब खुलते हैं दोस्त
तूने देखा भी है तो क्या देखा है,
इश्क़ में बंदा मर भी सकता है मैंने
दिल की दस्तावेज़ में लिखा देखा है,
मैं तो आँखें देख के ही बतला दूँगा
तुम में से किस किस ने दरिया देखा है,
आगे सीधे हाथ पे एक तराई है
मैंने पहले भी ये रस्ता देखा है,
तुम को तो इस बाग़ का नाम पता होगा
तुम ने तो इस शहर का नक़्शा देखा है..!!
~तहज़ीब हाफ़ी
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