आओ मनाएँ हम सब मिल कर अब जश्न ए आज़ादी
देस का झंडा ऊँचा रखे हाथ बनें फ़ौलादी,
पूरब में फिर लहरा उठा अम्न ओ अमाँ का परचम
बर्ग ए गुल पर नाच रही है मोती जैसी शबनम,
नदियों ने फिर छेड़ दिया है आज़ादी का सरगम
आओ मनाएँ हम सब मिल कर अब जश्न ए आज़ादी,
देस का झंडा ऊँचा रखे हाथ बनें फ़ौलादी
आज़ादी की ख़ातिर दी है हम सब ने क़ुर्बानी,
अबुल कलाम और नेहरू जैसे नेता थे ला सानी
उनके अज़्म के आगे हो गए दुश्मन पानी पानी,
आओ मनाएँ हम सब मिल कर अब जश्न ए आज़ादी
देस का झंडा ऊँचा रखे हाथ बनें फ़ौलादी,
माज़ी के ग़म आज भुला कर मुस्तक़बिल चमकाएँ
आपस के सब भेद मिटा कर प्यार के नग़्मे गाएँ,
गंग ओ जमन की इस धरती को फूलों से महकाएँ
आओ मनाएँ हम सब मिल कर अब जश्न ए आज़ादी,
~मसूदा हयात

























