तेरी जुदाई ने ये क्या बना दिया है मुझे
मैं भी जिस्म था साया बना दिया है मुझे,
समन्दरों से कोई कम न थी मेरी औक़ात
बस एक दर्द ने सहरा बना दिया है मुझे,
पुराने लोग समझते थे कुछ नया हूँ मैं
नये दिनों ने पुराना बना दिया है मुझे,
जो उस से रिश्ता था सब को बताये जाता है
गये दिनों का हवाला बना दिया है मुझे,
हसन जमील उन आँखों की क्या करूँ तारीफ़
खुदा को मानने वाला बना दिया है मुझे..!!
~हसन जमील
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