है ख़ुशी से किस तरह ग़म का ख़सारा देखिए

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है ख़ुशी से किस तरह ग़म का ख़सारा देखिए आसमान ए यास पर उगता सितारा देखिए, आप गर

जब शहर ए दिल में पड़ गए उस ज़र बदन के पाँव

jab-shahar-e-dil-me-pad-gaye-us-zar-badan-ke-paanv

जब शहर ए दिल में पड़ गए उस ज़र बदन के पाँव पड़ते नहीं ज़मीन पे अब इस

शिगाफ़ ए ख़ाना ए दिल से ही रौशनी आई

shigaaf-e-khana-e-dil-se-hi-raushni-aayi

शिगाफ़ ए ख़ाना ए दिल से ही रौशनी आई उसे तो आना था हर हाल में चली आई,

जो समझाते भी आ कर वाइज़ ए बरहम तो क्या करते

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जो समझाते भी आ कर वाइज़ ए बरहम तो क्या करते हम इस दुनिया के आगे उस जहाँ

आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था

aakhir-gam-e-jaanaan-ko-ae-dil-badh-kar-gam-e-dauraan-hona-tha

आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था इस क़तरे को बनना

एक छोटा सा ख़्वाब था जो पूरा नहीं हुआ

ek chhota saa khwab tha jo poora nahi hua

एक छोटा सा ख़्वाब था जो पूरा नहीं हुआ वो शख्स मेरा हो कर भी मेरा नहीं हुआ,

हम ने कब चाहा कि वो शख़्स हमारा हो जाए

hum ne kab chaaha ki wo shakhs humara ho jaaye

हम ने कब चाहा कि वो शख़्स हमारा हो जाए इतना दिख जाए कि आँखों का गुज़ारा हो

सूरज उस के घर की कोई खिड़की है

sooraj us ke ghar kee koi khidki hai

सूरज उस के घर की कोई खिड़की है सुब्ह खुले तो शाम को बँद हो जाती है, नस्ल

क्या अंधेरा है क्या उजाला है

kya andhera hai kya ujaala hai

क्या अंधेरा है क्या उजाला है ये नज़रिये का बस हवाला है, रंग बस एक ही है दुनिया

मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा

mujhe-yaqeen-hai-koi-raasta-to-nikalega

मुझे यक़ीं है कोई रास्ता तो निकलेगा अगर जो कुछ नहीं निकला ख़ुदा तो निकलेगा, मैं रेगज़ारों में