अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं

apno ne wo ranj diye hai begaane yaad aate hain

अपनों ने वो रंज दिए हैं बेगाने याद आते हैं देख के उस बस्ती की हालत वीराने याद

दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं

dil ki baat labon par la kar ab tak hum dukh sahte hain

दिल की बात लबों पर ला कर अब तक हम दुख सहते हैं हम ने सुना था इस

शेर से शायरी से डरते हैं

sher se shayari se darte hain

शेर से शायरी से डरते हैं कम नज़र रौशनी से डरते हैं, लोग डरते हैं दुश्मनी से तेरी

बेवफ़ा तुम को भुलाने में तकल्लुफ़ कैसा

bewafa tum ko bhulaane me takalluf kaisa

बेवफ़ा तुम को भुलाने में तकल्लुफ़ कैसा आइना सच का दिखाने में तकल्लुफ़ कैसा तीरगी घर की मिटाने

रात कुछ तारीक भी है और कुछ रौशन भी है

raat kuch taarik bhi hai aur kuch raushan bhi

रात कुछ तारीक भी है और कुछ रौशन भी है वक़्त के माथे पे शोख़ी भी है भोला

वक़्त का मारा हुआ इंसाँ रऊनत का शिकार

waqt ka maara hua insaan ranaut ka shikaar

वक़्त का मारा हुआ इंसाँ रऊनत का शिकार जिस की मेहनत का नतीजा अज़मत ए सरमायादार, अस्ल में

रहोगे हम से कब तक बेख़बर से

rahoge ham se kab tak bekhabar se

रहोगे हम से कब तक बेख़बर से जुदा होती नहीं दीवार दर से, मुसाफ़िर हाल क्या अपना सुनाए

तस्कीन न हो जिस में वो राज़ बदल डालो

taskeen na ho jis me wo raaz badal daalo

तस्कीन न हो जिस में वो राज़ बदल डालो जो राज़ न रख पाए हमराज़ बदल डालो, तुम

मोहब्बत ख़ुद ही अपनी पर्दादार ए राज़ होती है

mohabbat khud hi apni pardadar e raaz hoti hai

मोहब्बत ख़ुद ही अपनी पर्दादार ए राज़ होती है जो दिल पर चोट लगती है वो बे आवाज़

अमीरों के बुरे अतवार को जो ठीक समझे है

amiron ke bure avtar ko jo thik samjhe

अमीरों के बुरे अतवार को जो ठीक समझे है मेरी हक़ बात को वो क़ाबिल ए तश्कीक समझे