दिल धड़कने का सबब याद आया

dil dhadakane ka sabab yaad aaya

दिल धड़कने का सबब याद आया वो तेरी याद थी अब याद आया, आज मुश्किल था सँभलना ऐ

दिल में एक लहर सी उठी है अभी

dil me ek lahar see uthi hai abhi

दिल में एक लहर सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी, कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज

सुना है जब से कि तुम को भी ग़म गवारा है

suna hai jab se ki tum ko bhi gam gavara hai

सुना है जब से कि तुम को भी ग़म गवारा है ख़याल अब हमें अपना नहीं तुम्हारा है,

वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है

wo hans dete hain jab mahfil me mera naam aata hai

वो हँस देते हैं जब महफ़िल में मेरा नाम आता है ख़ुदा की देन है दीवानापन यूँ काम

कौन कहता है कि पी कर दूर हो जाते हैं ग़म ?

kaun kahta hai ki pee kar door ho jate hai gam

कौन कहता है कि पी कर दूर हो जाते हैं ग़म ? और याद आती हैं बातें और

क्या क्या न सामने से ज़माने गुज़र गए

kya kya na saamne se zamane guzar gaye

क्या क्या न सामने से ज़माने गुज़र गए एक ग़म था जिस ने साथ न छोड़ा जिधर गए,

आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए

aaraaeesh e bahaar ka saamaan kahan se aaye

आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए या’नी जुनूँ में रोज़ गरेबाँ कहाँ से आए ? इंसाँ

मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे

main hazar baar chahoon ki wo muskura ke dekhe

मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे उसे क्या गरज़ पड़ी है जो नज़र उठा के

सब को मा’लूम है ये बात कहाँ

sab ko malum hai ye baat kahan

सब को मा’लूम है ये बात कहाँ दिन कहाँ काटता हूँ रात कहाँ ? इस को तक़दीर ही

कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के

kal tak ye phool rooh e ravan the bahar ke

कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के तुम ने अभी अभी जिन्हें फेंका उतार के,