ख़ुद हो गाफ़िल तो अक्सर ये भी भूल जाते है

khud-ho-gafil-to

ख़ुद हो गाफ़िल तो अक्सर ये भी भूल जाते है कि ख़ुदा सब देख रहा है वो अंजान

आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे

aankh-par-patti-rahe

आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे अपने शाह ए वक़्त का यूँ मर्तबा आला रहे

ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी

ye-amiro-se-hamari

ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी फिर कहाँ से बीच में मस्ज़िद ओ मंदिर आ गए ?

भरोसा कैसे करे कोई अब तिज़ारत के हवालो का ?

bharosa-kaise-kare-koi

भरोसा कैसे करे कोई अब तिज़ारत के हवालो का ? न रहा सत्ता का यकीं हमको, न सत्ता

रंगों की आड़ में खुनी खेल, ये इंसानियत क्या जाने ?

rango-ki-aad-me

रंगों की आड़ में खुनी खेल, ये इंसानियत क्या जाने ? हरा, भगवा में डूबे हुए केसरिया का

बात करते है यहाँ क़तरे भी समन्दर की तरह

baat karte hai yahan qatre bhi samndar ki tarah

बात करते है यहाँ क़तरे भी समन्दर की तरह अब लोग ईमान बदलते है कैलेंडर की तरह, कोई

भीतर भीतर आग भरी है बाहर बाहर पानी है

bhitar-bhitar-aag-bhari

भीतर भीतर आग भरी है बाहर बाहर पानी है तेरी मेरी, मेरी तेरी सब की यही कहानी है,

खून में डूबी सियासत नहीं देखी जाती

khoon-me-dubi-siyasat

खून में डूबी सियासत नहीं देखी जाती हमसे अब देश की हालत नहीं देखी जाती, उनके चेहरों से

दरिन्दे खून बहने का इंतज़ार करेंगे

darinde-khoon-bahne-ka

दरिन्दे खून बहने का इंतज़ार करेंगे भरे पेट वाले अब भूखो पे वार करेंगे, वतन में क़त्ल ए

ज़मी सूखी है और पानी के भी लाले है…

zamin sukhi hai pani ke bhi lale hai

ज़मी सूखी है और पानी के भी लाले है इन्सान ही आज इन्सान के निवाले है जिनके दिलो