शेर से शायरी से डरते हैं

sher se shayari se darte hain

शेर से शायरी से डरते हैं कम नज़र रौशनी से डरते हैं, लोग डरते हैं दुश्मनी से तेरी

बेवफ़ा तुम को भुलाने में तकल्लुफ़ कैसा

bewafa tum ko bhulaane me takalluf kaisa

बेवफ़ा तुम को भुलाने में तकल्लुफ़ कैसा आइना सच का दिखाने में तकल्लुफ़ कैसा तीरगी घर की मिटाने

जल रहे हैं दिए मुंडेरों पर

jal rahe hai diye munderon par

जल रहे हैं दिए मुंडेरों पर हो रहा है करम अँधेरों पर तुम जो बन कर किरन किरन

जब से आई है दीपावली

jab se aai hai deepawali

जब से आई है दीपावली हर तरफ़ छाई है रौशनी हर जगह चाहतों के दिए शाम होते ही

दीवाली के दीप जलाएँ आ जाओ

deewali ke deep jalayen aa jaao

दीवाली के दीप जलाएँ आ जाओ रौशन रौशन गीत सुनाएँ आ जाओ गोशे गोशे में तज़ईन-ओ-ज़ेबाई साफ़ करें

रात कुछ तारीक भी है और कुछ रौशन भी है

raat kuch taarik bhi hai aur kuch raushan bhi

रात कुछ तारीक भी है और कुछ रौशन भी है वक़्त के माथे पे शोख़ी भी है भोला

वक़्त का मारा हुआ इंसाँ रऊनत का शिकार

waqt ka maara hua insaan ranaut ka shikaar

वक़्त का मारा हुआ इंसाँ रऊनत का शिकार जिस की मेहनत का नतीजा अज़मत ए सरमायादार, अस्ल में

सुनो मादर-ए-हिन्द के नौ-निहालो

suno madar e hind ke nau nihaalo

सुनो मादर-ए-हिन्द के नौ-निहालो सदाक़त पे गर्दन कटा लेने वालो उठो ख़्वाब-ए-ग़फ़लत मिटा लो मिटा लो कमर-बस्ता हो

घर की क़िस्मत जगी घर में आए सजन

ghar ki qismat jagi ghar me aaye sajan

घर की क़िस्मत जगी घर में आए सजन ऐसे महके बदन जैसे चंदन का बन आज धरती पे

घुट गया अँधेरे का आज दम अकेले में

ghut gaya andhere ka aaj dam akele me

घुट गया अँधेरे का आज दम अकेले में हर नज़र टहलती है रौशनी के मेले में आज ढूँढने