हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है

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हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है कहीं कोई जो मोहब्बत शि’आर बाक़ी है, खुली ही

कम मयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत

kam mayassar ho jo hoti hai usi kee qeemat

कम मयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत कसरत ए ग़म ने बढ़ाई है ख़ुशी की क़ीमत,

नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है

nazar me sab kee meri be khudi ka aalam hai

नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है किसे ख़बर कि बड़ी बेबसी का आलम है,

जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं

jab se dil me tere bakhshe hue gam thahre hain

जब से दिल में तेरे बख़्शे हुए ग़म ठहरे हैं महरम और भी अपने लिए हम ठहरे हैं,

तरह तरह के सवालात करते रहते हैं

tarah tarah ke swalat karte rahte hain

तरह तरह के सवालात करते रहते हैं अब अपने आप से हम बात करते रहते हैं, अता हुई

नियाज़ ए इश्क़ से नाज़ ए बुताँ तक बात जा पहुँची

niyaz e ishq se naaz e butaan tak baat ja pahunchi

नियाज़ ए इश्क़ से नाज़ ए बुताँ तक बात जा पहुँची ज़मीं का तज़्किरा था आसमाँ तक बात

क्या कहें ये जब्र कैसा ज़िंदगी के साथ है

kya kahe ye zabr kaisa zindagi ke sath hai

क्या कहें ये जब्र कैसा ज़िंदगी के साथ है हम किसी के साथ हैं और दिल किसी के

ख़ुद अपनी ज़िल्लत ओ ख़्वारी न करना

khud apni zillat o khwari na karna

ख़ुद अपनी ज़िल्लत ओ ख़्वारी न करना किसी कमज़र्फ़ से यारी न करना, अगर तुम शाद रहना चाहते

दिल में मेरे अरमान बहुत हैं

dil me mere arman bahut hain

दिल में मेरे अरमान बहुत हैं इस घर में मेहमान बहुत हैं, आप ज़माने को क्या जानें आप

जैसे कोई रब्त नहीं हो जैसे हों अनजाने लोग

jaise koi rabt nahi ho jaise ho anjane log

जैसे कोई रब्त नहीं हो जैसे हों अनजाने लोग क्या से क्या हो जाते हैं अक्सर जाने पहचाने