लिबास तन से उतार देना, किसी को बांहों के हार देना

लिबास तन से उतार

लिबास तन से उतार देना, किसी को बांहों के हार देना फिर उसके जज़्बों को मार देना, अगर

मुक़म्मल दो ही दानों पर ये तस्बीह ए मुहब्बत है

मुक़म्मल दो ही दानों

मुक़म्मल दो ही दानों पर ये तस्बीह ए मुहब्बत है जो आये तीसरा दाना ये डोरी टूट जाती

हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है

हम-पर-तुम्हारी-चाह

हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है दुश्नाम तो नहीं है ये इकराम ही तो है,

हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई

हम सादा ही ऐसे

हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई जिस बार ख़िज़ाँ आई समझे कि बहार आई, आशोब

गो सब को बहम साग़र ओ बादा तो नहीं था

गो सब को बहम

गो सब को बहम साग़र ओ बादा तो नहीं था ये शहर उदास इतना ज़ियादा तो नहीं था,

सितम की रस्में बहुत थीं लेकिन न थी तिरी अंजुमन से पहले

सितम की रस्में बहुत

सितम की रस्में बहुत थीं लेकिन न थी तिरी अंजुमन से पहले सज़ा ख़ता ए नज़र से पहले

न किसी पे ज़ख़्म अयाँ कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है

न किसी पे ज़ख़्म

न किसी पे ज़ख़्म अयाँ कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है न करम है हम पे

मैं अभी देख के आया हूँ हरे जंगल को

मैं अभी देख के आया

मैं अभी देख के आया हूँ हरे जंगल को सब्ज़ पेड़ों में भी वीरानी बहुत होती है, उन

हर एक बात पे मुस्कुराता है झूठा

har-ek-baat-pe

हर एक बात पे मुस्कुराता है झूठा कोई गम तो है जो छुपाता है झूठा, सब ख़ुश है,

मौत की सुन के ख़बर प्यार जताने आए

मौत की सुन के

मौत की सुन के ख़बर प्यार जताने आए रूठे दुनिया से जो हम यार मनाने आए अच्छे दिन