डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को

dara-ke-mauj-o-talatum-se-hum-nasheeno

डरा के मौज ओ तलातुम से हम नशीनों को यही तो हैं जो डुबोया किए सफ़ीनों को, जमाल

वो तो गया ये दीदा ए ख़ूँ बार देखिए

wo-to-gaya-ye-deeda-e-khoon-baar-dekhiye

वो तो गया ये दीदा ए ख़ूँ बार देखिए दामन पे रंग ए पैरहन ए यार देखिए, दिखला

जल्वा ए गुल का सबब दीदा ए तर है कि नहीं

jalwa-e-gul-ka-sabab-deedaa-e-tar-hai-ki-nahi

जल्वा ए गुल का सबब दीदा ए तर है कि नहीं मेरी आहों से बहाराँ की सहर है

आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था

aakhir-gam-e-jaanaan-ko-ae-dil-badh-kar-gam-e-dauraan-hona-tha

आख़िर ग़म ए जानाँ को ऐ दिल बढ़ कर ग़म ए दौराँ होना था इस क़तरे को बनना

ख़त्म शोर ए तूफ़ाँ था दूर थी सियाही भी

khatm-shor-e-tufaan-tha-door-thi-siyaahi-bhi

ख़त्म शोर ए तूफ़ाँ था दूर थी सियाही भी दम के दम में अफ़्साना थी मेरी तबाही भी,

चमन है मक़्तल ए नग़्मा अब और क्या कहिए

chaman-hai-maqtal-e-nagma-ab-aur-kya-kahiye

चमन है मक़्तल ए नग़्मा अब और क्या कहिए बस एक सुकूत का आलम जिसे नवा कहिए, असीर

ख़ंजर की तरह बू ए समन तेज़ बहुत है

khanzar-kee-tarah-boo-e-saman-tej-bahut-hai

ख़ंजर की तरह बू ए समन तेज़ बहुत है मौसम की हवा अब के जुनूँ ख़ेज़ बहुत है,

इस बाग़ में वो संग के क़ाबिल कहा न जाए

is-baag-me-wo-sang-ke-qaabil-kaha-na-jaaye

इस बाग़ में वो संग के क़ाबिल कहा न जाए जब तक किसी समर को मिरा दिल कहा

आ ही जाएगी सहर मतला ए इम्काँ तो खुला

aa-hi-jayegi-sahar-matla-e-imkaan-to-khula

आ ही जाएगी सहर मतला ए इम्काँ तो खुला न सही बाब ए क़फ़स रौज़न ए ज़िंदाँ तो

अल्फाज़ के झूठे बंधन में

alfaaz ke jhuthe bandhan me

अल्फाज़ के झूठे बंधन में आगाज़ के गहरे परों में हर शख्स मुहब्बत करता है, हालाकिं मुहब्बत कुछ