बहुत पेपर पे छपने हैं तो ठप्पा काट लेते हैं
बहुत पेपर पे छपने हैं तो ठप्पा काट लेते हैं पिता जी मर गए हैं तो अँगूठा काट
Life Status
बहुत पेपर पे छपने हैं तो ठप्पा काट लेते हैं पिता जी मर गए हैं तो अँगूठा काट
भला कब मैं निशाने पर नहीं आया मेरे हाथों में पर पत्थर नहीं आया, मैं तौबा दोस्ती से
गली गली आबाद थी जिन से कहाँ गए वो लोग दिल्ली अब के ऐसी उजड़ी घर घर फैला
शजर जिस पे मैं रहता हूँ उसे काटा नहीं करता मैं आतिश मुल्क से सपने में भी धोका
इश्क़ से दिल को ऊबा देखा जिस्म का जब से सौदा देखा, भूका हम ने राजा देखा सागर
ख़ुद को बीमार मत किया कर यार डूब कर प्यार मत किया कर यार, जब मदद चाहे कोई
कोशिशें कर लो मैं बादल नहीं होने वाला बरसों बे वज्ह यूँ पागल नहीं होने वाला, शर्त ये
सब पुराने ख़याल बदलो यार वक़्त बदला है साल बदलो यार, मात हर बार थोड़ी खाऊँगा वक़्त के
क्या है ऊँचाई मोहब्बत की बताते जाओ पंछियों उड़ के यूँ ही ख़्वाब दिखाते जाओ, पेड़ पत्थर का
दिल में है क्या अज़ाब कहे तो पता चले दीवार ख़ामोशी की ढहे तो पता चले, सब कुछ