कठ पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मत

kath putli hai ya jivan hai jite jaao socho mat

कठ पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मत सोच से ही सारी उलझन है जीते जाओ

न जाने कौन सा मंज़र नज़र में रहता है

na jaane kaun saa manzar nazar me rahta hai

न जाने कौन सा मंज़र नज़र में रहता है तमाम उम्र मुसाफ़िर सफ़र में रहता है, लड़ाई देखे

इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी

insan me haiwan yahan bhi hai wahan bhi

इंसान में हैवान यहाँ भी है वहाँ भी अल्लाह निगहबान यहाँ भी है वहाँ भी, ख़ूँ ख़्वार दरिंदों

देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ

dekha hua saa kuch hai to socha hua saa kuch

देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ हर वक़्त मेरे साथ है उलझा हुआ सा

ज़मीन दी है तो थोड़ा सा आसमान भी दे

zameen dee hai to thoda saa aasmaan bhi de

ज़मीन दी है तो थोड़ा सा आसमान भी दे मेरे ख़ुदा मेरे होने का कुछ गुमान भी दे,

गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया

girja me mandiron me azaanon me bat gaya

गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया होते ही सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया, इक इश्क़

अश्क ए नादाँ से कहो बाद में पछताएँगे

ashk e naadaan se kaho baad me pachhtayenge

अश्क ए नादाँ से कहो बाद में पछताएँगे आप गिर कर मेरी आँखों से किधर जाएँगे ? अपने

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा

har ghadi khud se uljhna hai muqaddar mera

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समुंदर मेरा, किस

ये कैसी कश्मकश है ज़िंदगी में

ye kaisi kashmaksh hai zindagi me

ये कैसी कश्मकश है ज़िंदगी में किसी को ढूँडते हैं हम किसी में, जो खो जाता है मिल

घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे

ghar se nikale to ho socha bhi kidhar jaaoge

घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगे हर तरफ़ तेज़ हवाएँ हैं बिखर जाओगे, इतना आसाँ