जब भी बैठता हूँ लिखने

जब भी बैठता हूँ

जब भी बैठता हूँ लिखने कुछ लिखा जाता नहीं, एक उसके सिवा कोई मौज़ूअ मुझे याद आता नहीं,

वो बेवफ़ा है उसे बेवफ़ा कहूँ कैसे

वो बेवफ़ा है उसे

वो बेवफ़ा है उसे बेवफ़ा कहूँ कैसे बुरा ज़रूर है लेकिन बुरा कहूँ कैसे ? जो कश्तियों को

चश्म ए तर है सहाब है क्या है

चश्म ए तर है

चश्म ए तर है सहाब है क्या है अश्क गौहर है आब है क्या है ? मरना जीना

खो गया है जो उस को खोने दो

खो गया है जो

खो गया है जो उस को खोने दो फिर नया ख़्वाब मुझ को बोने दो, सुनों ऐ बस्तियों

नई पोशाक पहने है पुराने ख़्वाब की हसरत

नई पोशाक पहने है

नई पोशाक पहने है पुराने ख़्वाब की हसरत मैं हँस कर टाल देती हूँ दिल ए बेताब की

वो कौन है जो मुझ पे तअस्सुफ़ नहीं करता

वो कौन है जो

वो कौन है जो मुझ पे तअस्सुफ़ नहीं करता पर मेरा जिगर देख कि मैं उफ़्फ़ नहीं करता,

मरज़ ए इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे

मरज़ ए इश्क़ जिसे

मरज़ ए इश्क़ जिसे हो उसे क्या याद रहे न दवा याद रहे और न दुआ याद रहे,

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे

अब तो घबरा के

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे मर के भी चैन न पाया तो किधर

धूप सरों पर और दामन में साया है

धूप सरों पर और

धूप सरों पर और दामन में साया है सुन तो सही जो पेड़ो ने फ़रमाया है, कैसे कह

बैर दुनिया से क़बीले से लड़ाई लेते

बैर दुनिया से क़बीले

बैर दुनिया से क़बीले से लड़ाई लेते एक सच के लिए किस किस से बुराई लेते, आबले अपने