किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी मुझको एहसास दिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ
Life Poetry
किसी रंजिश को हवा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी मुझको एहसास दिला दो कि मैं ज़िंदा हूँ
मेरे दुख की कोई दवा न करो मुझको मुझ से अभी जुदा न करो, नाख़ुदा को ख़ुदा कहा
सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं जिस को देखा ही नहीं उस को ख़ुदा कहते हैं,
कुछ तो दुनिया की इनायात ने दिल तोड़ दिया और कुछ तल्ख़ी ए हालात ने दिल तोड़ दिया,
बूढ़ा टपरा, टूटा छपरा और उस पर बरसातें सच उसने कैसे काटी होगी, लंबी लंबी राते सच ?
सज़ा पे छोड़ दिया कुछ जज़ा पे छोड़ दिया हर एक काम को मैं ने ख़ुदा पे छोड़
क़िस्से मेरी आशुफ़्ता नवाई के बहुत थे चर्चे तेरी अंगुश्त नुमाई के बहुत थे, दुनिया की तलब ही
दिल से मंज़ूर तेरी हम ने क़यादत नहीं की ये अलग बात अभी खुल के बग़ावत नहीं की,
नज़र नज़र से मिला कर कलाम कर आया ग़ुलाम शाह की नींदें हराम कर आया, कई चराग़ हवा
वो मेरे ख़्वाब की ताबीर तो बताए मुझे मैं धूप में हूँ मगर ढूँढते हैं साए मुझे, मैं