ज़मीं पे चल न सका आसमान से भी गया

Zamin pe chal na

ज़मीं पे चल न सका आसमान से भी गया कटा के पर को परिंदा उड़ान से भी गया,

अब तो शहरों से ख़बर आती है दीवानों की

Ab to shaharon se

अब तो शहरों से ख़बर आती है दीवानों की कोई पहचान ही बाक़ी नहीं वीरानों की, अपनी पोशाक

तख़्लीक़ पे फ़ितरत की गुज़रता है गुमाँ और

Takhliq pe fitrat ki

तख़्लीक़ पे फ़ितरत की गुज़रता है गुमाँ और इस आदम ए ख़ाकी ने बनाया है जहाँ और, ये

हालत ए हाल के सबब हालत ए हाल ही गई

Halat e haal ke

हालत ए हाल के सबब हालत ए हाल ही गई शौक़ में कुछ नहीं गया शौक़ की ज़िंदगी

तुम आए हो न शब ए इंतिज़ार गुज़री है

Tum Aye ho na

तुम आए हो न शब ए इंतिज़ार गुज़री है तलाश में है सहर बार बार गुज़री है, जुनूँ

कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी

Kab Thahrega Dard e

कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी सुनते थे वो आएँगे सुनते थे सहर होगी, कब

नया एक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम ?

Naya ek Rishta Paida

नया एक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम ? बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम ? ख़मोशी से

लोग कहते हैं ज़माने में मुहब्बत कम है

Log kahte hain zamane

लोग कहते हैं ज़माने में मुहब्बत कम है ये अगर सच है तो इस में हकीक़त कम है,

आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा

Aankhon me raha dil

आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा कश्ती के मुसाफ़िर ने समुंदर नहीं देखा, बेवक़्त अगर

कोई उम्मीद बर नहीं आती

Koi ummid bar nahin

कोई उम्मीद बर नहीं आती कोई सूरत नज़र नहीं आती, मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँ