सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना

safar ko jab bhi

सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना क़दम यक़ीन में मंज़िल गुमान में रखना, जो साथ है

मैं अपने इख़्तियार में हूँ भी नहीं भी हूँ

main apne ikhtiyar me

मैं अपने इख़्तियार में हूँ भी नहीं भी हूँ दुनिया के कारोबार में हूँ भी नहीं भी हूँ,

उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा

uske dushman hai bahut

उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा, इतना सच

बात ऐसी तो करो दिल पे असर कोई करे

baat aisi to karo

बात ऐसी तो करो दिल पे असर कोई करे बिन तेरे कैसे जीया तुझ को ख़बर कोई करे,

तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है

tu is qadar mujhe

तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है तुझे अलग से जो सोचूँ अजीब लगता है, जिसे न

जब लगे ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाये

jab lage zakhm to

जब लगे ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाये है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाये,

है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूबतर कहाँ

hai justazoo ki khoob

है जुस्तुजू कि ख़ूब से है ख़ूबतर कहाँ अब ठहरती है देखिए जा कर नज़र कहाँ हैं दौर

बिगड़ने वाला किसी दिन सँवर ही जाएगा

bigadne wala kisi din

बिगड़ने वाला किसी दिन सँवर ही जाएगा मिज़ाज ए दोस्त बिल आख़िर सुधर ही जाएगा, मरीज़ ए इश्क़

सहरा के संगीन सफ़र में आबरसानी कम न पड़े

sahara ke sangeen safar

सहरा के संगीन सफ़र में आबरसानी कम न पड़े सारी आँखें भर कर रखना देखो पानी कम न

आए हैं सराए में तो घर जाएँगे क्या है

aaye hai saraye me

आए हैं सराए में तो घर जाएँगे क्या है हम लोग किसी रोज़ गुज़र जाएँगे क्या है हम